आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह शहर के बीचोंबीच रिहायशी कालोनी का नजारा है। जहां खाली प्लाट पर इधर-उधर का कचरा डंप किया जाना प्रतीत होता है। वहीं इन सबके बीच कचरे में प्लास्टिक की पॉलीथिन सबसे ज्यादा दिखाई देगी, जो कि मवेशियों की जान पर जोखिम के समान है। क्योंकि, आवारा मवेशी घूमते-घूमते कचरे के ढ़ेर पर पहुंचते हैं। जहां खाद्य सामग्री के चक्कर में पॉलीथिन का सेवन कर लेते हैं। यही कारण है कि ऐसे मामलों में मवेशियों की असमय मौत हो जाती है। जबकि पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य की दृष्टि से प्लास्टिक की पॉलीथिन का इस्तेमाल प्रतिबंधित कर रखा है। लेकिन इसका जमीनी स्तर पर बराबर पालन नही हो रहा है। फलस्वरूप, अब भी शहर के मुख्य बाजार समेत गली-मोहल्लों की किराना दुकान, चाय-पान की गुमठी और हाथठेलों पर पॉलीथिन का इस्तेमाल बेखौफ जारी है। जिस पर नजर पड़ते ही शिक्षित एवं जागरूक नागरिक तंज कसना नही भूलते, कि यह बात गलत है।
यह बात गलत है

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